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संघर्ष और प्रेरणा की कहानी
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एक बच्चा था, रोज़ स्कूल पैदल जाता था। उसकी पेंसिल छोटी होती गई लेकिन उसका हौसला दिन-ब-दिन बड़ा होता गया। उसने कभी हार नहीं मानी। स्कूल में पढ़ाई करते समय उसकी एक ही पेंसिल थी, जो कि इतनी छोटी हो गई थी कि उसे पकड़ना भी मुश्किल हो रहा था। लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी। पढ़ाई करने की उसकी चाहत ने उसे आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
एक दिन, उसकी मेहनत और लगन को देखकर टीचर ने उसे नई किताबें और एक नई पेंसिल दी। उस पल में उसे एहसास हुआ कि मेहनत का फल मीठा होता है। उसकी पुरानी पेंसिल, हर बार उसे अपनी मेहनत और संघर्ष की याद दिलाती थी।
वह बच्चा बड़ा हुआ और अंततः एक महान वैज्ञानिक बना। अपनी पुरानी पेंसिल को वह हमेशा अपने पास रखता था, क्योंकि वह उसकी प्रेरणा थी। उसने साबित कर दिया कि अगर दिल में हौसला हो, तो रास्ते की कोई भी कठिनाई बाधा नहीं बन सकती।