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हिम्मत से डर को पार करें
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डर से ज़्यादा ताकत हिम्मत में होती है। गांव की सुबह, सूरज की पहली किरणें और पक्षियों का चहचहाना। आरव, मीरा और चिंटू खेल रहे हैं। आरव की आंखों में साहस की चमक है। मीरा शांत और समझदार है, लेकिन चिंटू थोड़ा डरा हुआ है। "क्या तुम लोग रात में उस पुरानी हवेली में चलोगे?" आरव ने मुस्कराते हुए पूछा। "क्या? नहीं, वो तो खौफनाक है!" चिंटू ने कहा। आरव हंसता है। "डरना नहीं चाहिए। हिम्मत दिखाओ!" तभी हवेली से एक हल्की सी आहट सुनाई देती है। सब चुप हो जाते हैं। हवेली की दरवाजे के पास, एक रहस्यमयी आत्मा प्रकट होती है। "तुम्हारे डर से ज्यादा ताकत हिम्मत में है," आत्मा कहती है। सभी की आंखें चौड़ी हो जाती हैं। "मैं तुम सबका रक्षक हूं," आत्मा ने कहा। "तुम्हें अपनी हिम्मत पर विश्वास करना होगा।" आरव की आंखों में चमक आ जाती है। मीरा ने संजीदगी से कहा, "हमें कोशिश करनी चाहिए।" चिंटू ने घबराते हुए कहा, "क्या अगर कुछ हुआ?" "बस मेरे साथ आओ," आरव ने कहा। हवेली के भीतर कदम रखते ही अंधेरा गहरा होता जाता है। तभी एक चमकती रौशनी दिखती है। "यहां कुछ खास है," मीरा ने कहा। एक पुराना खजाना उनके सामने है। "डर ने हमें रोक दिया था," चिंटू ने कहा। "लेकिन हिम्मत ने हमें आगे बढ़ाया," आरव ने मुस्कुराते हुए कहा। आत्मा ने उन्हें सराहा, "अब तुम जान चुके हो कि डर को पार करना जरूरी है।" सभी ने एक-दूसरे को देखा और हंस पड़े। "हमने किया," चिंटू ने कहा, अब और ज्यादा साहसी। "सिर्फ हिम्मत से ही हम जीत सकते हैं," मीरा ने कहा।