आत्मा का खौफनाक दस्तक!
Description
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“रात 3 बजे दरवाज़े पर दस्तक हुई…” अगर रात के 3 बजे तुम्हारे दरवाज़े पर कोई दस्तक दे… तो दरवाज़ा मत खोलना। क्योंकि एक लड़का अपने कमरे में अकेला था। रात ठीक 3:03 बजे— ठक… ठक… ठक… उसने पूछा, “कौन है?” बाहर से उसकी माँ की आवाज़ आई— “बेटा… दरवाज़ा खोल।” वो दरवाज़े तक गया… लेकिन तभी उसके फोन पर माँ का कॉल आया। उसने फोन उठाया। माँ बोली— “बेटा, मैं तो अभी पड़ोस में हूँ… घर पर मत जाना।” लड़के के हाथ-पैर ठंडे पड़ गए। क्योंकि बाहर से फिर आवाज़ आई— “बेटा… दरवाज़ा खोल।” इस बार आवाज़ बिल्कुल उसकी माँ जैसी नहीं थी। वो धीरे से पीछे हटा… तभी दरवाज़े के नीचे से एक काली परछाईं अंदर आने लगी। और फिर बाहर से फुसफुसाहट आई— “मुझे पता है… तुम अंदर हो।” सुबह दरवाज़ा खोला गया… बाहर कोई नहीं था। लेकिन दरवाज़े पर अंदर की तरफ लिखा था— “अगली बार… मैं अंदर आऊँगी।”